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झाँझरिया उसकी छनक गयी चुनरी भी सर से सरक गयी मेरी नज़र उससे मिली तो उसकी नज़र शरमा के झुक गयी झाँझरिया हो उससे नज़र मिली बिच बाज़ार में दिल गया लुट नज़रों की तकरार में मुद मुद के वो देखे मुझे जैसे की वो खुद भी मचल गयी झाँझरिया किस्सा अजीब था पहली मुलाक़ात का आलम गज़ब हुवा मेरे दिल के हाल का इक पल मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी धड़कन रुक गयी झाँझरिया [ झाँझरिया उसकी छनक गयी ] Narender Kumar
प्यार भरे दो शर्मीले नैन जिनसे मिला मेरे दिल को चैन कोई जाने न क्यूँ मुझसे शर्माए कैसे मुझे तडपाये दिल ये कहे गीत मैं तेरे गाऊँ तू ही सुने और मैं गाता जाऊं तू जो रहे साथ मेरे दुनिया को ठुकराऊँ तेरा दिल बहलाऊँ प्यार भरे दो शर्मीले नैन रूप तेरा कलियों को शर्माए कैसे कोई अपने दिल को बचाए पास है तू फिर भी जलूं कौन तुझे समझाए सावन बीता जाए प्यार भरे दो शर्मीले नैन डर है मुझे तुझसे बिछड़ न जाऊं खो के तुझे मिलने की राह न पाऊँ ऐसा न हो जब भी तेरा नाम लबों पर लाऊँ मैं आंसू बन जाऊं प्यार भरे दो शर्मीले नैन - गोल्डेन कलेक्सन ऑफ़ मेहदी हसन से -
अपनी आँखों में बसा कर कोई इकरार करूँ जी में आता है के जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसा कर कोई इकरार करूँ मैंने कब तुझसे ज़माने की ख़ुशी मांगी है एक हलकी सी मेरे लब ने हंसी मांगी है सामने तुझको बिठा कर तेरा दीदार करूँ जी में आता है के जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसा कर कोई इकरार करूँ साथ छूटे न कभी तेरा यह कसम ले लूं हर ख़ुशी दे के तुझे तेरे सनम ग़म ले लूं हाय मैं किस तरह से प्यार का इज़हार करूँ जी में आता है के जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसा कर कोई इकरार करूँ
इन्तिहा आज इश्क की कर दी, आप के नाम ज़िन्दगी कर दी, था अँधेरा गरीब खाने में, आप ने आ के रोशनी कर दी, देने वाले ने उन को हुस्न दिया, और अता मुझ को आशिकी कर दी, तुम ने जुल्फों को रुख पे बिखरा कर, शाम रं गी न और भी कर दी
रिश्ता क्या है तेरा मेरा, मैं हूँ शब और तू है सवेरा, तू है चाँद सितारों जैसा, मेरी किस्मत घोर अँधेरा, फूलों जैसे राहें तेरी, काटों जैसा मेरा डेरा, आता जाता है ये जीवन, पल-दो-पल का रैन बसेरा,
"कुछ तो मजबूरियाँ रहीं होंगी यूँ कोई बेवफा नही होता जी बहुत चाहता है सच बोलें क्या करें हौसला नही होता अपना दिल भी टटोल कर देखो फासला बेवजह नही होता॥" "कोई हँसे तो तुझे ग़म लगे खुशी ना लगे तू रोज़ रोया करे उठ के चाँद रातों में खुदा करे तेरा मेरे बगैर जी न लगे तू भी लुट जाए यूँही आके किसी कि बातों में।"
जिस्म जलता है बहुत दो पल नहाने दो मुझे झील सी अपनी आँखों में डूब जाने दो मुझे. हस्ती से बेजारी न थी मौत से यारी न थी उन राहों पर चल दिए जिसकी तैयारी न थी. फासला तो है मगर अब कोई फासला नहीं है तुम मुझसे जुदा सही मगर दिल से जुदा नहीं. आओ मै और तुम मिलकर चिरागेदिल जलाये कल कैसी हवा चले यह कोई जानता ही नहीं