झाँझरिया उसकी छनक गयी चुनरी भी सर से सरक गयी मेरी नज़र उससे मिली तो उसकी नज़र शरमा के झुक गयी झाँझरिया हो उससे नज़र मिली बिच बाज़ार में दिल गया लुट नज़रों की तकरार में मुद मुद के वो देखे मुझे जैसे की वो खुद भी मचल गयी झाँझरिया किस्सा अजीब था पहली मुलाक़ात का आलम गज़ब हुवा मेरे दिल के हाल का इक पल मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी धड़कन रुक गयी झाँझरिया [झाँझरिया उसकी छनक गयी ] |
Narender Kumar
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