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कब सुधरेगा राजस्थान लोक सेवा आयोग

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से 30 अप्रेल से 5 मई तक आयोजित होने वाली द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले ही विद्यार्थियों को कई तरह दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में कहीं अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिलने की शिकायत है तो कहीं एक ही अभ्यर्थी के पास तीन से लेकर चार तक प्रवेश पत्र एक ही लिफाफे में पहुंच रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग से इसकी शिकायत की गई, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं। ऐसा कब तक चलेगा?

भारत में भ्रस्टाचार

आज भारत मेंजो देखने को मिल रहा है शायद ही किसी ने आज से ६५ साल पहले सोचा होगा। आज के ये हालत देखकर लगता है की आजादी के लिए अपनी क़ुरबानी देने वालों की क़ुरबानी व्यर्थ ही गयी इससे अच्छी तो गुलामी थी। आज जहा भी देखो सब के सब भ्रष्ट देखने को मिलते है। इन सब की वजह हम खुद है। हम क्यों बढ़ावा दे रहे है इस भ्रस्टाचार को? ऐसी क्या मज़बूरी है की हम खुद इसे बढ़ावा दे रहे है? क्या ये जरुरी है? इस देश में गरीबो की क्यों नहीं सुनी जा रही है? क्या आज कोई भूख से नहीं मरता? अगर कोई भूख से मरता है तो क्यों? आजादी के इतने वर्षो बाद भी हम क्यों भूखे मर रहे है? आज दुनिया की ११वीं आर्थिक महाशक्ति बन चूका है हमारा भारत लेकिन जो गरीबी से भूखे मर रहे है उन के लिए सरकार, नेता या अफसर कोई आगे क्यों नहीं आता? आज कोई भी नेता बिना गाड़ी के नहीं चलता है और गरीब भूख से मरता है और आम जनता महंगाई से मरती है किसान कर्ज से मरता है तो जिन्दा कौन है सिर्फ नेता और उधोगपति और अफसर लोग । नेताओ को बहुत सारी सुविधाएँ मिल रही है किसलिए? जनता की सेवा के लिए या खुद की सेवा के लिए? इन सबकी वजह सिर्फ और सिर्फ एक ही है और हर कोई इसका ...
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई ख़ास नहीं. एक दोस्त है कच्चा पक्का सा, एक झूठ है आधा सच्चा सा. ज़ज्बात को ढके एक पर्दा बस, एक बहाना है अच्छा सा. जीवन का एक ऐसा साथी है, जो दूर हो के पास नहीं. कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई ख़ास नहीं. हवा का एक सुहाना झोंखा है, कभी नाजुक तोह कभी तुफानो सा. सकल देख कर जो नज़रें झुका ले, कभी अपना तोह कभी बेगानों सा. जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र, जो समंदर है, पर दिल को प्यास नहीं. कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई ख़ास नहीं. एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है, यादों में जिसका एक धुन्धला चेहरा रह जाता है. यूह तोह उसके न होने का कुछ गम नहीं, पर कभी-कभी आँखों से अनसु बन के बह जाता है. यूह रहता तोह मेरे तस्सवुर में है, पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं. कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं, तुम कह देना कोई ख़ास नहीं... Narender Kumar
होंटों से छू लो तुम , मेरा गीत अमर कर दो बन जाओ मीत मेरे , मेरी प्रीत अमर कर दो होंटों से छू लो तुम , मेरा गीत अमर कर दो न उम्र की सीमा हो , न जन्म का हो बंधन जब प्यार करे कोई , तो देखे केवल मनन नयी रीत चलाकर तुम , यह रीत अमर कर दो आकाश का सूनापन , मेरे तन्हा मन में पायल छनकाती तुम , आ जाओ जीवन में सांसें देकर अपनी , संगीत अमर कर दो संगीत अमर कर दो , मेरा गीत अमर कर दो जग ने छीना मुझसे , मुझे जो भी लगा प्यारा सब जीता किये मुझसे , मैं हर दम ही हारा तुम हारके दिल अपना , मेरी जीत अमर कर दो होंटों से छू लो तुम , मेरा गीत अमर कर दो
माँ की गोद , असीमित सुख ! मुलायम पलना झूलती बाहें अद्भुत संगीत बंद ऑंखें तैरते सपने टपकता अमृत शांत मान निशिचंत शरीर कोमल स्पर्श शुद्ध भावनाएं प्रथम विश्राम अंतिम इच्छा माँ की गोद , असीमित सुख !
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है-२ ये उठे सुबह चले, ये झुखे शाम ढले, मेरा जीना मेरा मरना इन्ही पल्कोंके तले, तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है पल्कोंके गलियों में चेहरे बहारों के हँसते हुए है मेरे खवाबों के क्या क्या नगर इन में बसते हुए पल्कोंके गलियों में चेहरे बहारों के हँसते हुए ये उठे सुबह चले , ये झुखे शाम ढले , मेरा जीना मेरा मरना इन्ही पलकों के तले , तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है इनमे मेरे आनेवाले ज़माने की तस्वीर है चाहत के काजल से लिखी हुई मेरी तकदीर है तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है-२ ये उठे सुबह चले, ये झुखे शाम ढले, मेरा जीना मेरा मरना इन्ही पल्कोंके तले, तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है
झाँझरिया उसकी छनक गयी चुनरी भी सर से सरक गयी मेरी नज़र उससे मिली तो उसकी नज़र शरमा के झुक गयी झाँझरिया हो उससे नज़र मिली बिच बाज़ार में दिल गया लुट नज़रों की तकरार में मुद मुद के वो देखे मुझे जैसे की वो खुद भी मचल गयी झाँझरिया किस्सा अजीब था पहली मुलाक़ात का आलम गज़ब हुवा मेरे दिल के हाल का इक पल मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी धड़कन रुक गयी झाँझरिया [ झाँझरिया उसकी छनक गयी ] Narender Kumar