कुछ ख़यालात जो मेरे दिल में आते है. उन्हें में इस ब्लॉग के जरिये व्यक्त करना चाहता हु . अगर आपको कुछ गलत लगे तो मुझे माफ़ कर देना ...........
आपका भाई
-नरेन्द्र स्वामी -
सोचिये जरा
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अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ - २ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ मैं ने कब तुझ से ज़माने की ख़ुशी माँगी है एक हलकी सी मेरे लब ने हँसी माँगी है - २ सामने तुझ को बिठाकर तेरा दीदार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ साथ छूटे न कभी तेरा यह क़सम ले लूँ हर ख़ुशी देके तुझे तेरे सनम ग़म ले लूँ - २ हाय, मैं किस तरह से प्यार का इज़हार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ
तुम्हे भुलाना इतना आसां नहीं, कहेते हो हमे भूला दिया तुमने. खुदा को क्या, तुमने देखा है कही. नहीं देखा फिर भी क्या भूल गए, मैंने देखा ही क्या, चाहा है तुम्हे, तो कहो कैसे तेरी यह बात सुने .
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