तुम्हे भुलाना इतना आसां नहीं, कहेते हो हमे भूला दिया तुमने. खुदा को क्या, तुमने देखा है कही. नहीं देखा फिर भी क्या भूल गए, मैंने देखा ही क्या, चाहा है तुम्हे, तो कहो कैसे तेरी यह बात सुने .
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प्यार भरे दो शर्मीले नैन जिनसे मिला मेरे दिल को चैन कोई जाने न क्यूँ मुझसे शर्माए कैसे मुझे तडपाये दिल ये कहे गीत मैं तेरे गाऊँ तू ही सुने और मैं गाता जाऊं तू जो रहे साथ मेरे दुनिया को ठुकराऊँ तेरा दिल बहलाऊँ प्यार भरे दो शर्मीले नैन रूप तेरा कलियों को शर्माए कैसे कोई अपने दिल को बचाए पास है तू फिर भी जलूं कौन तुझे समझाए सावन बीता जाए प्यार भरे दो शर्मीले नैन डर है मुझे तुझसे बिछड़ न जाऊं खो के तुझे मिलने की राह न पाऊँ ऐसा न हो जब भी तेरा नाम लबों पर लाऊँ मैं आंसू बन जाऊं प्यार भरे दो शर्मीले नैन - गोल्डेन कलेक्सन ऑफ़ मेहदी हसन से -
रोना मना है - ईद है
बड़े चाव से एक मियाँ ने, घर में बकरा पाला जी । बेटी पानी देती उसको, देता मियाँ निवाला जी ॥ स्वार्थ भरा था प्यार मियाँ का, पर बेटी का निश्छल था । सिर्फ ईद का इंतजार ही, बड़े मियाँ को पल - पल था ॥ ऐसी आयी ईद कि आँगन, आज लहू से सन बैठा । रोज़ निवाला देने वाला, मियाँ भी दानव बन बैठा ॥ इक झटके में बकरे का सिर,धड़ से अलग किया देखो। भोली बेटी समझ न पायी, ये क्या किया मियाँ देखो ॥ रोज़ की भाँति आयी है, बकरे को देने पानी जी । कलम भी रोई मेरी लिखकर, ऐसी मर्म कहानी जी ॥ आज जरा सा भी देखो, पानी का बर्तन नही रीता । सोंच रही बालक बुद्धि , क्यों बकरा पानी नही पीता ॥ ईद के दिन भी सुस्त पड़ा है, क्यों मन में उल्लास नही ? कटे शीश से पूछ रही, क्या मुन्ना तुझको प्यास ...



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