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Showing posts from 2011

ठहरे हुए पानी में कंकर ना मार सांवरे

ठहरे  हुए  पानी  में  कंकर  ना  मार  सांवरे मन  में  हलचल  सी  मच  जायेगी  बाँवरे  ठहरे  हुए  पानी  में  कंकर  ना  मार  सांवरे मन  में  हलचल  सी  मच  जायेगी  बाँवरे   ठहरे  हुए  पानी  में  कंकर  ना  मार  सांवरे तेरे  लिए  हु  मई  अनजानी , मेरे  लिए  है  तू  बेगाना बेगाने  ने  अनजानी  का , दर्द  भला  कैसे  पहचाना जो  इस  दुनिया  ने  ना  जाना ठहरे  हुए  पानी  में  कंकर  ना  मार  सांवरे मन  में  हलचल  सी  मच  जायेगी  बाँवरे   ठहरे  हुए  पानी  में  कंकर  ना  मार  सांवरे सब  फूलो  के  है  दीवाने , काटों   से  दिल  कौन  लगाये भूल   रही  मै  हु  का...

किसका चेहरा अब मैं देखूं

चाँद  भी  देखा फूल  भी  देखा बादल  बिजली  तितली  जुगनू कोई  नहीं  है  ऐसा तेरा  हुस्न  है  जैसा तेरा  हुस्न  है  जैसा मेरी  निगाह  ने  ये  कैसा  ख्वाब  देखा  है ज़मीन  पे  चलता  हुआ  महताब  देखा  है मेरी  आँखों  ने  चुना  है  तुझको  दुनिया  देखकर मेरी  आँखों  ने  चुना  है  तुझको  दुनिया  देखकर किसका  चेहरा किसका  चेहरा  अब  मैं  देखूं  तेरा  चेहरा  देखकर मेरी  आँखों  ने  चुना  है  तुझको  दुनिया  देखकर नींद  भी  देखि ख्वाब  भी  देखा नींद  भी  देखि ख्वाब  भी  देखा चूड़ी  बिंदिया  दर्पण  खुशबू कोई  नहीं  है  ऐसा तेरा  प्यार  है  जैसा तेरा  प्यार  है  जैसा मेरी  आँखों  ने  चुना  है...

क्रिश्मस एवं नव वर्ष की सुभकामनाएँ

क्रिश्मस एवं नव वर्ष की  सुभकामनाएँ नरेन्द्र  कुमार स्वामी 
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नवरात्र की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाये आपका :- नरेन्द्र स्वामी

भ्रष्ट, बईमान, गद्दार नेता

आज भी करोड़ों लोग रात को पेट भरने के लिए सूखी रोटी पानी में भिगो कर खाते हैं | और करोड़ों लोग तो भूके पेट ही सो जाते हैं | माँ भारती पर इससे बड़ा कलंक और क्या हो सकता है की जिस देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था उस देश में आज लोगों को रोटी तक के लाले पद रहे हैं, और दुसरे तरफ भ्रष्ट, बईमान, गद्दार लोग इस देश को बेच कर मौज कर रहे हैं |  

कब सुधरेगा राजस्थान लोक सेवा आयोग

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से 30 अप्रेल से 5 मई तक आयोजित होने वाली द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले ही विद्यार्थियों को कई तरह दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में कहीं अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिलने की शिकायत है तो कहीं एक ही अभ्यर्थी के पास तीन से लेकर चार तक प्रवेश पत्र एक ही लिफाफे में पहुंच रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग से इसकी शिकायत की गई, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं। ऐसा कब तक चलेगा?

भारत में भ्रस्टाचार

आज भारत मेंजो देखने को मिल रहा है शायद ही किसी ने आज से ६५ साल पहले सोचा होगा। आज के ये हालत देखकर लगता है की आजादी के लिए अपनी क़ुरबानी देने वालों की क़ुरबानी व्यर्थ ही गयी इससे अच्छी तो गुलामी थी। आज जहा भी देखो सब के सब भ्रष्ट देखने को मिलते है। इन सब की वजह हम खुद है। हम क्यों बढ़ावा दे रहे है इस भ्रस्टाचार को? ऐसी क्या मज़बूरी है की हम खुद इसे बढ़ावा दे रहे है? क्या ये जरुरी है? इस देश में गरीबो की क्यों नहीं सुनी जा रही है? क्या आज कोई भूख से नहीं मरता? अगर कोई भूख से मरता है तो क्यों? आजादी के इतने वर्षो बाद भी हम क्यों भूखे मर रहे है? आज दुनिया की ११वीं आर्थिक महाशक्ति बन चूका है हमारा भारत लेकिन जो गरीबी से भूखे मर रहे है उन के लिए सरकार, नेता या अफसर कोई आगे क्यों नहीं आता? आज कोई भी नेता बिना गाड़ी के नहीं चलता है और गरीब भूख से मरता है और आम जनता महंगाई से मरती है किसान कर्ज से मरता है तो जिन्दा कौन है सिर्फ नेता और उधोगपति और अफसर लोग । नेताओ को बहुत सारी सुविधाएँ मिल रही है किसलिए? जनता की सेवा के लिए या खुद की सेवा के लिए? इन सबकी वजह सिर्फ और सिर्फ एक ही है और हर कोई इसका ...