अपना दिल पेश करूँ, अपनी वफ़ा पेश करूँ
कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करूँ
मेरे ख़्वाबों में भी तू, मेरे ख़यालों में भी तू
कौन सी चीज़ तुझे तुझसे जुदा पेश करूँ
जो तेरे दिल को लुभा ले, वो अदा मुझमें नहीं
क्यों न तुझको कोई तेरी ही अदा पेश करूँ
तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़मा छेड़ूँ
या तेरे दर्द-ए-जुदाई का ग़िला पेश करूँ
अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ - २ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ मैं ने कब तुझ से ज़माने की ख़ुशी माँगी है एक हलकी सी मेरे लब ने हँसी माँगी है - २ सामने तुझ को बिठाकर तेरा दीदार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ साथ छूटे न कभी तेरा यह क़सम ले लूँ हर ख़ुशी देके तुझे तेरे सनम ग़म ले लूँ - २ हाय, मैं किस तरह से प्यार का इज़हार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ
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