अपना दिल पेश करूँ, अपनी वफ़ा पेश करूँ
कुछ समझ में नहीं आता तुझे क्या पेश करूँ
मेरे ख़्वाबों में भी तू, मेरे ख़यालों में भी तू
कौन सी चीज़ तुझे तुझसे जुदा पेश करूँ
जो तेरे दिल को लुभा ले, वो अदा मुझमें नहीं
क्यों न तुझको कोई तेरी ही अदा पेश करूँ
तेरे मिलने की ख़ुशी में कोई नग़मा छेड़ूँ
या तेरे दर्द-ए-जुदाई का ग़िला पेश करूँ
तुम्हे भुलाना इतना आसां नहीं, कहेते हो हमे भूला दिया तुमने. खुदा को क्या, तुमने देखा है कही. नहीं देखा फिर भी क्या भूल गए, मैंने देखा ही क्या, चाहा है तुम्हे, तो कहो कैसे तेरी यह बात सुने .
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